हर एक कश में

हर एक कश में
एक ज़िम्मा रखा था
ज़िन्दगी बहाने का
फ़िक्र आज़माने का
लम्हे बिखरे
एक फ़कीर की फरियाद की तरह
शाम की विरासत
रात ने लूटा दी
वोह पानी की तरह बही
आँखों में
मेरी, तुम्हारी
अब कश लम्बा हो चला
कुछ पल मेरे होठों पे रुका
तुम्हारी नज़र की तरह
अब वोह भी उड़ गया
खुले आकाश में
जो बादल से बंधा था
अब रात नहीं
कश भी नहीं
तुम भी नहीं
तुम्हारी याद?
खैर
हर एक कश में
एक ज़िम्मा रखा था

1 comments:

  • Sohini | November 22, 2011 12:31 AM

    I'm speechless..

    "शाम की विरासत
    रात ने लूटा दी
    वोह पानी की तरह बही
    आँखों में
    मेरी, तुम्हारी".. simply wow!!

    Ab toh zindagi ne ek aisa mod liya hai, jahan har khwab, har fariyaad aur sunheri yaadein .. nayanjal bankar behti hain..